Sunday, March 25, 2012
अपनों ने दिए जख्म
आबरू की उडी धज्जियाँ, बदल गया ईमान।
अपनों ने दिए जख्म, उम्मीदों पर फिरा पानी,
बेखुदी ने किया बेबस, गैरों को कैसे दूँ इलज़ाम॥
Friday, February 3, 2012
'देश राग" नाम से देशभक्ति संगीत प्रतियोगिता का आयोजन
- रिकॉर्डेड कृति को ऑनलाइन जमा कराने की आखिरी तारिख 28 फरवरी 2012
- चयनित पांच कलाकारों की कृति को एक एलबम का रूप दिया जाएगा
- देशराग के विजयी कलाकार का लाइव परफॉर्म भारत-पाकिस्तान सीमा बाघा बोर्डर पर
Sunday, January 15, 2012
Tuesday, January 10, 2012
पूछ रहा है देश का बचपन

पूछ रहा है देश का बचपन
राह दिखाने वालों से,
दशा देश की ऐसी क्यूं
क्यों हो, तुम मतवाले से?
लोकतंत्र का ह्रदय हमारा
संसद भी रोया है,
वैष्णो देवी की यात्रा पे
अलख राग भी सोया है,
अपनी ही धरती पर राम
पड़े हुए बंजारे से।
अमरनाथ की यात्रा पर
आतंक यूँ गुर्राया है,
अर्थ जगत का संबल
मुंबई भी थर्राया है,
लाल किला का घाव अभी
है हरा दीवारों पे।
संकट मोचन का प्रांगण
खून से होली खेला है,
अक्षरधाम का अक्षर अक्षर
रक्तपात को झेला है,
घायल क्यों है केसरी बाना
आतंक के अंधियारे से।
वोट बैंक की राजनीति में
देश से कुर्सी प्यारा है,
संसद के बहसों में देखो
जूता -चप्पल न्यारा है,
क्या तेरी काली करतूतों से
मां घायल है तलवारों से।
सुनो हमारी माता ने पीड़ा में
हमें पुकारा है
यौवन लेकर साथ चलें
कमर कसें आगे बढ़े
तरूणाई बनकर बचपन
राख हटा अंगारे से
मुक्ति मिलेगी तभी हमें
आतंकी अंधियारे से...।
Sunday, December 11, 2011
एक पेड़ ऐसा जिस पर फले रूपए
खरीदारी के लिए संपर्क करें- ९९७१४२३३५८, ९८९९८४८५२७, ९३१२३८१३०५
Friday, August 26, 2011
देश के नागरिकों से एक आग्रह
फिर भी बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो अन्ना के मुहिम में शामिल होना तो चाहते हैं लेकिन कुछ-न-कुछ ऐसी मजबूरी सामने आ जाती है जो उन्हें अन्ना के साथ खड़ा होने नहीं दे रही है या वह अन्ना की मुहिम में अपना योगदान नहीं कर पा रहे हैं। वैसे लोगों की संख्या हजारों, लाखों नहीं करोड़ों में है। इसमें हम आैर आप भी हैं।
हम आैर आप अन्ना की मुहिम का समर्थन 'यथा शक्ति यथा भक्ति" के मुताबिक भी कर सकते हैं, वह भी बिना दिनचर्या को बिगाड़े। न ज्यादा समय का खर्च आैर न ही ज्यादा आर्थिक नुकसान। अन्ना के मुहिम को बल देने के लिए आपका पचास पैसा बहुत बड़ा योगदान दे सकता है।
पचास पैसा हर कोई खर्च कर सकता है, चाहे जैसी भी परिस्थिति हो। आपको सिर्फ डाकघर तक जाना है। आप जहां भी रहते हैं, या जहां भी हैं, उससे जो भी डाकघर पास पड़ता वहां जाएं पोस्टकार्ड खरीदें आैर प्रधानमंत्री को पत्र लिखें।
फिर देर किस बात की है। डाकघर पहंुचिए आैर पत्र लिख डालिए प्रधानमंत्री के नाम ...।
प्रधानमंत्री के नाम लिखे पत्र में क्या लिखना है, यह आपके स्वविवेक पर निर्भर करता है। आप चाहें तो आम नागरिक होने के नाते सरल शब्दों में अन्ना के सशक्त जनलोकपाल बिल के समर्थन में पत्र लिख सकते हैं या फिर आप आस-पास गैर कानूनी तरीके से होने वाले कार्य निष्पादन के बारे में भी पत्र में लिख सकते हैं।
प्रधानमंत्री के नाम पोस्टकार्ड लिखिए, अन्ना की मुहिम को बल देने के लिए। आपका यह छोटा सा अंशदान आैर श्रमदान देश के भविष्य, सुरक्षा, संरक्षा आैर सवद्र्धन के लिए बहुत जरूरी है। इससे आपकी दिनचर्या पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन आपको एक सुखद अहसास जरूर होगा कि आपने भी अन्ना की मुहिम को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। वह भले ही श्रीराम सेतु निर्माण में तल्लीन गिलहरी के योगदान जैसा क्यों न हो।
देश के प्रधानमंत्री का पता है-
प्रधानमंत्री कार्यालय
साउथ ब्लॉक, रायसिना हिल
नई दिल्ली-110001
निवेदक- दीपक राजा
अन्ना मुहिम का समर्थक
Wednesday, August 3, 2011
आवाज़ बुलंद कर हजारे

मगरूर नहीं हैं हम, अपनी ताकत से.
मार डाले नहीं मुझे, अपनी शरारत से..
ताउम्र बीत गई, चक्कर काटते-काटते.
न्याय मिलेगा जरूर, अपनी अदालत से..
मुव्वकिल की जर, जमीन और बिकी जोरू भी.
वकीलों ने बनाई इमारतें, अपनी वकालत से..
उकता गए हैं हम, हे भ्रष्ट प्रहरियों.
सब्र की सीमा है, अपनी शराफत से..
रस्ते के पत्थर ही नहीं, हटेंगे पर्वत भी.
आवाज़ बुलंद कर हजारे, अपनी बगावत से..
कौन आया कायनात में, रहने को सदा.
दिखा दो संसार को, अपनी अदावत से..
