Sunday, March 25, 2012

अपनों ने दिए जख्म

शराफत है ज़ख्मी और नेकी बदनाम,
आबरू की उडी धज्जियाँ, बदल गया ईमान।

अपनों ने दिए जख्म, उम्मीदों पर फिरा पानी,
बेखुदी ने किया बेबस, गैरों को कैसे दूँ इलज़ाम॥

Friday, February 3, 2012

'देश राग" नाम से देशभक्ति संगीत प्रतियोगिता का आयोजन

'देश राग" नाम से देशभक्ति संगीत प्रतियोगिता का आयोजन
  • रिकॉर्डेड कृति को ऑनलाइन जमा कराने की आखिरी तारिख 28 फरवरी 2012
  • चयनित पांच कलाकारों की कृति को एक एलबम का रूप दिया जाएगा
  • देशराग के विजयी कलाकार का लाइव परफॉर्म भारत-पाकिस्तान सीमा बाघा बोर्डर पर
लोक सेवा संचार परिषद् द्वारा निर्मित आैर दूरदर्शन द्वारा प्रचारित 1988 में बने 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' गीत ने पूरे भारत देश को एक तार में बांध दिया था। देश के हर कोने में इस गीत की गूंज थी क्योंकि इसमें चौदह भारतीय भाषाओं का प्रयोग किया गया था। वह गीत आज भी कभी दूरदर्शन पर प्रसारित होता है तो मन प्रसन्न हो जाता है।
भारत अब एक आजाद मुल्क है आैर इसलिए अब वतनपरस्ती के मायने बदल चुके हैं। आज गुलामी हमारी समस्या नहीं है लेकिन आज भी हम बहुत सी समस्याओं से घिरे हुए हैं, जिससे पार पाने के लिए रोज संघर्षरत हैं। संघर्षरत रहने के लिए जोश आैर उत्साह बनाए रखने में गीत संगीत का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। देश को आज भी बहुत से 'मिले सुर मेरा तुम्हारा", 'वंदे मातरम" सरीखे देशभक्ति गीतों की जरूरत है।
ऐसे ही देशभक्ति गीत आैर संगीत की खोज के लिए रक्षक फाउंडेशन 'देश राग" नाम से देशभक्ति संगीत प्रतियोगिता का आयोजन कर रही है। इस प्रतियोगिता की साहित्य सहयोगी संस्था कविता कोष है।
देश राग प्रतियोगिता के माध्यम से विश्वभर के भारतीय कलाकारों को आमंत्रित कर रहा है कि वे अपने संगीत साधना से देशभक्ति का एक ऐसा गीत रचें जो भारतीय जनमानस को छू जाए आैर उन्हें देश के लिए कुछ कर गुजरने को प्रेरित करें।
इस प्रतियोगिता में आपको पूरा गीत भेजना होगा जिसमें लेखन, संगीत आैर गायन सभी कुछ प्रतियोगी को ही करना है।
यानि देशभक्ति पर आधारित स्वलिखित गीत को खुद की बनाई धुन पर वाद्ययंत्रों के साथ अपनी ही आवाज में गायन करना है। इसमें व्यक्तिगत तौर पर या बैंड (कई कलाकारों के समूह) के तौर पर हिस्सा लिया जा सकता है।
प्रतियोगिता में भाग लेने के इच्छुक व्यक्तिगत गीतकार, गायक या संगीतकार प्रतियोगिता के नौर्म को पूरा करने के लिए कई कलाकारों के समूह यानि बैंड बनाकर भाग ले सकते हैं।
प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करने आैर अपनी रिकॉर्डेड कृति को ऑनलाइन जमा कराने की आखिरी तारिख 28 फरवरी 2012 है। इसके बाद एक मार्च से 15 मार्च तक के बीच ऑनलाइन जमा कराए गए रिकॉर्डेड कृति पर निर्णायक मंडल विचार करेंगे। निर्णायक मंडल द्वारा चुने गए अंतिम पांच कृति के कलाकारों की घोषणा 15 मार्च को वेबसाइट पर की जाएगी आैर घोषित कलाकारों को इसकी सूचना व्यक्तिगत तौर पर दी जाएगी।
चयनित पांच कलाकारों की कृति को एक एलबम का रूप दिया जाएगा। इसके लिए 16 मार्च से 31 मार्च के बीच रिकॉर्डिंग टाइम स्लॉट निर्धारित किया जाएगा। एलबम तैयार होने के बाद पांच अप्रैल 2012 को अंतिम पांच प्रतिभागियो में देशराग के विजयी कलाकारों की घोषणा की जाएगी। विजयी कलाकार का लाइव परफॉर्म भारत-पाकिस्तान सीमा बाघा बोर्डर पर किया जाएगा। इस परफार्म में जाने माने कलाकार देशराग के विजयी कलाकार के साथ सुर में सुर मिलाएंगे।
अधिक जानकारी के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट देशराग डॉट ओआरजी वेबसाइट को खंगाला जा सकता है।

Sunday, January 15, 2012

संसद



संवैधानिक कर्तव्यों पर
आम आदमी
जिस तरह
गौण है.

संसद भी
नीति निर्देशक तत्व के
सवाल पर
मौन है.

Tuesday, January 10, 2012

पूछ रहा है देश का बचपन




पूछ रहा है देश का बचपन
राह दिखाने वालों से,
दशा देश की ऐसी क्यूं
क्यों हो, तुम मतवाले से?



लोकतंत्र का ह्रदय हमारा


संसद भी रोया है,


वैष्णो देवी की यात्रा पे


अलख राग भी सोया है,


अपनी ही धरती पर राम


पड़े हुए बंजारे से।





अमरनाथ की यात्रा पर


आतंक यूँ गुर्राया है,


अर्थ जगत का संबल


मुंबई भी थर्राया है,


लाल किला का घाव अभी


है हरा दीवारों पे।




संकट मोचन का प्रांगण


खून से होली खेला है,


अक्षरधाम का अक्षर अक्षर


रक्तपात को झेला है,


घायल क्यों है केसरी बाना


आतंक के अंधियारे से।


वोट बैंक की राजनीति में


देश से कुर्सी प्यारा है,


संसद के बहसों में देखो


जूता -चप्पल न्यारा है,


क्या तेरी काली करतूतों से


मां घायल है तलवारों से।




सुनो हमारी माता ने पीड़ा में


हमें पुकारा है


यौवन लेकर साथ चलें


कमर कसें आगे बढ़े


तरूणाई बनकर बचपन


राख हटा अंगारे से


मुक्ति मिलेगी तभी हमें


आतंकी अंधियारे से...।

Sunday, December 11, 2011

एक पेड़ ऐसा जिस पर फले रूपए

हर आदमी, चाहे वो जहाँ भी है और जिस हालत में है, जीवन यापन कर रहा है। हर एक व्यक्ति अपनी स्थितियों और परिस्थितियों को अपने अनुसार बनाना चाहता है। उनके लिए जो कुछ बन पा रहा है, करने की कोशिश कर रहे हैं। हालाँकि जितना सोच पाते हैं, उतना नहीं मिल पाता है।एक मंच ऐसा मुझे दिखा है जहाँ से हर आदमी अपने जरुरत और इच्छा के मुताबिक अपने सपनों को हकीकत में बदल सकता है। अपने साथ साथ परिवार में आने वाली पीढ़ियों के लिए भी रुपये का पेड़ छोड़ सकता है। पेड़ तो एक साल में एक बार फल देता है, लेकिन मैं जिस पेड़ कि बात कर रहा हूँ वो साल में के बार नहीं पूरे बावन हफ्ते रुपये का फल दे सकता है।उस फल को पाने के लिए बस एक बार पेड़ का बीज खरीदना पड़ेगा। बीज को खरीदने के बाद बीज को पौधा बनाने तक ध्यान देना पड़ेगा। बीज एक बार पौधा बन जाये, फिर तो फलदार बनने से कोई नहीं रोक सकता है।रूपये के पेड़ का बीज खरीदने के लिए आपको सेक्योर लाइफ नाम के नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी के साथ जुडी कंपनियों का कोई एक प्रोडक्ट जो आपके लिए उपयोगी हो, खरीदना होगा। इसके साथ ही बीज आपके हाथ में आ जायेगा। प्रोडक्ट क्या है, इसे देखने के लिए आप वेब http://www.securedlives.com/ सर्च करके देख सकते है।

खरीदारी के लिए संपर्क करें- ९९७१४२३३५८, ९८९९८४८५२७, ९३१२३८१३०५

Friday, August 26, 2011

देश के नागरिकों से एक आग्रह

जनलोकपाल विधेयक को लेकर देश अभी अन्नामय है। अन्ना के समर्थन में देश के कोने-कोने में धरना प्रदर्शन हो रहे हैं। हजारों लोग दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना के साथ अनशन में शरीक भी हैं। लोगों को लगता है कि अन्ना के अनशन से समाज आैर देश का भला होने वाला है। धीरे-धीरे अन्ना की मुहिम के समर्थकों का कारवां बढ़ रहा है।

फिर भी बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो अन्ना के मुहिम में शामिल होना तो चाहते हैं लेकिन कुछ-न-कुछ ऐसी मजबूरी सामने आ जाती है जो उन्हें अन्ना के साथ खड़ा होने नहीं दे रही है या वह अन्ना की मुहिम में अपना योगदान नहीं कर पा रहे हैं। वैसे लोगों की संख्या हजारों, लाखों नहीं करोड़ों में है। इसमें हम आैर आप भी हैं।

हम आैर आप अन्ना की मुहिम का समर्थन 'यथा शक्ति यथा भक्ति" के मुताबिक भी कर सकते हैं, वह भी बिना दिनचर्या को बिगाड़े। न ज्यादा समय का खर्च आैर न ही ज्यादा आर्थिक नुकसान। अन्ना के मुहिम को बल देने के लिए आपका पचास पैसा बहुत बड़ा योगदान दे सकता है।

पचास पैसा हर कोई खर्च कर सकता है, चाहे जैसी भी परिस्थिति हो। आपको सिर्फ डाकघर तक जाना है। आप जहां भी रहते हैं, या जहां भी हैं, उससे जो भी डाकघर पास पड़ता वहां जाएं पोस्टकार्ड खरीदें आैर प्रधानमंत्री को पत्र लिखें।
फिर देर किस बात की है। डाकघर पहंुचिए आैर पत्र लिख डालिए प्रधानमंत्री के नाम ...।

प्रधानमंत्री के नाम लिखे पत्र में क्या लिखना है, यह आपके स्वविवेक पर निर्भर करता है। आप चाहें तो आम नागरिक होने के नाते सरल शब्दों में अन्ना के सशक्त जनलोकपाल बिल के समर्थन में पत्र लिख सकते हैं या फिर आप आस-पास गैर कानूनी तरीके से होने वाले कार्य निष्पादन के बारे में भी पत्र में लिख सकते हैं।

प्रधानमंत्री के नाम पोस्टकार्ड लिखिए, अन्ना की मुहिम को बल देने के लिए। आपका यह छोटा सा अंशदान आैर श्रमदान देश के भविष्य, सुरक्षा, संरक्षा आैर सवद्र्धन के लिए बहुत जरूरी है। इससे आपकी दिनचर्या पर बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन आपको एक सुखद अहसास जरूर होगा कि आपने भी अन्ना की मुहिम को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। वह भले ही श्रीराम सेतु निर्माण में तल्लीन गिलहरी के योगदान जैसा क्यों न हो।

देश के प्रधानमंत्री का पता है-

प्रधानमंत्री कार्यालय
साउथ ब्लॉक, रायसिना हिल
नई दिल्ली-110001



निवेदक- दीपक राजा
अन्ना मुहिम का समर्थक

Wednesday, August 3, 2011

आवाज़ बुलंद कर हजारे


मगरूर नहीं हैं हम, अपनी ताकत से.
मार डाले नहीं मुझे, अपनी शरारत से..

ताउम्र बीत गई, चक्कर काटते-काटते.
न्याय मिलेगा जरूर, अपनी अदालत से..

मुव्वकिल की जर, जमीन और बिकी जोरू भी.
वकीलों ने बनाई इमारतें, अपनी वकालत से..

उकता गए हैं हम, हे भ्रष्ट प्रहरियों.
सब्र की सीमा है, अपनी शराफत से..

रस्ते के पत्थर ही नहीं, हटेंगे पर्वत भी.
आवाज़ बुलंद कर हजारे, अपनी बगावत से..

कौन आया कायनात में, रहने को सदा.
दिखा दो संसार को, अपनी अदावत से..